हर किसी की नज़र मेरे बदन पर है,
कसूर इन नजरों में किसका क्या देखूं !
मजबूरी-ए-हालतें-दौर में खड़ी होकर मै,
जमाने में क्या बुरा और अच्छा क्या देखूं !
मेरा भूत पेट सताता है मुझको और फिर मै,
रोता-बिलखता कैसे अपने पेट का टुकड़ा देखूं !
रोज सामना होता है मेरा भूख और गरीबी से ,
फिर ये जमाना क्यों बिगड़े,जब बदन मै अपना बेचूं !
किस्मत का खेल देखिये तो सही हालात ये है ,
मजबूरन बिस्तर पर रोज सुहाग एक नया देखूं !
बार-बार चलना है जब इस राह पर तो यहां ,
चलकर गिरना फिर गिरकर गिरना क्या देखूं !
कुछ पा लिया तो खोने का डर कैसा ,
वक्त गया तो मै वक्त का क्या देखूं !
मेरी मजबूरियों ने मुझे लुटा तो क्या लूटा ,
अपनी हर मजबूरी में मै मजबूर-ए-हालात देखूं !
लोकप्रिय पोस्ट
-
है वास्ता तेरा इससे जहर ये तू भी पीयेगा, अगर पसंद आई तुझको तो जिंदगी ये तू भी जियेगा १ तेरी हल्की सी पहचान से रिश्ता कोई भी बने , उस से ह...
-
वक़्त और हालात से जूझना फितरत है आदमी की, इसने हर सांचे में डलने के हूनर को सीख लिया! बैर हुआ जब हारने और हराने वाले से तब साम ,दाम ,दंड ...
-
क्या कहना कॉलेज की लड़कियों के, डरते है लड़के इनकी धमकियों से , हर दौर की शुरूवात होती है इनकी बड़ी अच्छी यकीं हो जाता है इनकी बातो पर झूठ...
-
सपना रोज़ मै भी देखता हूँ , खुश होता हु और रोता हूँ. जमाने में बस यह हकीकत है मेरी , कभी कंगाल तो कभी राजा होता हूँ . माना की भवंरा ही ...
-
हर किसी की नज़र मेरे बदन पर है, कसूर इन नजरों में किसका क्या देखूं ! मजबूरी-ए-हालतें-दौर में खड़ी होकर मै, जमाने में क्या बुरा और अच्छ...
-
एक ही फूल को कई बागों में खिलते देखा है मैंने , एक ही फूल पर कईयों को लड़ते देखा है मैंने ! यूँ तो मुझे भी डर है गुलशन-ए- शबाब का, जिसे र...
-
हम राजदां सही कुछ भी तो नही छुपाते है , मुहबत का फलसफा यह सरे-बज्म सुनते है , अजनबी सा लगता है हर आशना भी , जब नाम अपना ही कहीं से कोई पु...
-
आज भी जुटे हैं लोग उनको सताने में , राज़ थी जो बात उस बात को बताने में | आशिक और माशूक मिलकर बिछड़े तो क्या हुआ, तुम गुनाह क्यों करते हो इस ...
-
क्या सोचकर माँगा उसने किनारा मुझसे मजधार में ,खुद ही मजधार को किनारा समझे बैठा हूँ मै ! चलने के तक्क्लुफ़ के लिए कहने लगा वो शक्स मुझसे जिसक...
-
लो अब उठाता हूँ अपने गुनाहों से पर्दा, यूँ कोशिस-ए-बेकार में कोई सताए ना मुझे! तेरे सामने किया ऍब सबसे मै छिपाता था, अब तेरा अपना भी डर ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें