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मंगलवार, 22 दिसंबर 2009

mere gavn me

है वास्ता तेरा इससे जहर ये तू भी पीयेगा,
अगर पसंद आई तुझको तो जिंदगी ये तू भी जियेगा १
तेरी हल्की सी पहचान से रिश्ता कोई भी बने ,
उस से ही बनेगी तेरी खुसी से तू जिस से भी मिलेगा १
खाने पीने की चिंता कब सताती है गांव में ,
किसी घर जाओ चूल्हा एक जलता ही मिलेगा १
गर बिन पहचान का मेहमान बनकर भी तू मिलेगा ,
भोजन  और सम्मान यहां तुझे घर जैसा  ही मिलेगा १
यहां लुटने  का डर है न लुटाने का डर है .
हर घर में तुझको बुजुर्ग एक बैठा ही मिलेगा  १
इनकी आस्था को कभी ठेस ना पहुंचाना मुसाफिर ,
चमकता है जो रात भर यहां वो जुगनू भी मिलेगा १
मै भी दमख़म रखता हूँ तुझसे मिलने का मुसाफिर ,
होगा जो तेरी जुबान में दम और जब नज़र तू अपनी मिलेगा  1

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