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शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

college time

क्या कहना कॉलेज की लड़कियों के, डरते है लड़के इनकी धमकियों से ,
हर दौर की शुरूवात होती है इनकी बड़ी अच्छी 
यकीं हो जाता है इनकी बातो पर झूठी कहे या सच्ची 
एक हाथ दोस्ती की तरफ तो दूसरा जेब की और बढाती है 
तब इन्हें कुछ और नहीं कैंटीन की याद सताती है 
जिद्द पर अड़ जाये तो जीत इनकी पक्की है 
सवांग ऐसा रचती है मनो हर बात इनकी सच्ची है 
वाह ऋ छात्रा आने वाली पीड़ी का हो आदर्श तुम,
गरीबी छलकती तन से जिस पर है वस्त्र  गम 
वैसे कहे तो क्या खूब है आज के स्टुडेंट का चरित्र 
लड़कियों को लुभाने के लिए लगाते है महंगा इत्र,
लड़की मिल जाये तो सुब कुछ भूल जाते है ,
बाद में बदनामी का ठीकरा ही सर पर उठाते है 
अब इसमें दौष किसी का तो होगा ही तन विपरीत है आकर्षण तो होगा ही
मुसाफिर क्या यह कोई झूठी कहानी है या बदनाम करते हैं लोग जिसे क्या यह वही जवानी हैं!

2 टिप्‍पणियां:

  1. really nic,main v ek college student hu aap ne kitni simple way me college me hone wali baato ko kabita ke rup me bana diya hai............

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  2. thank you amit ji , mere hisaab se maine jo dekha whi likh diya aur mere hisaab se aap bhi dekhna college ki jhalak ko aur use apne shabdo me likhkar dekhna aap bhi badiya likhenge

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